गजल
शीर्षक--एक झलक
विधा--गजल
रचनाकार--डी पी लहरे
तेरी सुरत का मुझे एक झलक पाने दो
दिल~ए~आबाद को आज संवर जाने दो।।1।।
तु ही है चाॅद मेरी
दिलो और जाॅन मेरी
तु ही मुस्कान मेरी
इश्क अरमान मेरी....
इश्क मंजिल में मुझे आज गुजर जाने दो
तेरी सुरत का मुझे एक झलक पाने दो।।2।।
दिल~ए~आबाद है
आबाद ही रहेगा सदा
तु मेरी नाज है
सहऩाज ही रहेगी सदा
हुस्न गुलज़ार में मुझे आज उतर जाने दो
तेरी सुरत का मुझे एक झलक पाने दो।।3।।
तेरी मुरत मैं मेरे
दिल में बनाऊँगा
तेरे ही नाम का मैं
दीप रोज जलाऊँगा
मेरे महबूब मोहब्बत में निखर जाने दो
तेरी सुरत का मुझे एक झलक पाने दो।।
इस कदर चाहूँ बस
प्यार करूँ
तेरी हर पल मैं
यूँ ही दीदार करूँ
खुदा माना तुझे साॅसों में बिखर
जाने दो
तेरी सुरत का मुझे एक झलक पाने दो।।।
सहऩाज =दुल्हन
गुलजार =खिला खिला,सौंदर्य
निखर=निर्मलपन
बिखर=फैलना,
दीदार=देखना
कापी राईट सुरक्षित है
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