वेलेंटाईन

वेलेंटाईन

दिल ए जागीर में तेरा रूप बसा है
मेरी ऑखों में तेरी सुरत सजा है

हर सुबह तुझे पाने की आश
पा कर भी नही बुझती है प्यास

हँसी से महकता दिल का चाॅद
मेरी सजनी मै  हूँ तेरा जान

तुझे देख धक धक दिल करता है
पास रहो दिल तुझपे ही मरता है

पा कर तुम्हे संवर गई जिन्दगी हमारी
तुम प्यार की देवी और हम हैं पुजारी। ।

नहीं आती हमें कोई दुनियादारी
तुम मेरी राधा मैं तेरी बनवारी।।

जनम जनम तक साथ न छुटे
जग से डर नही तु मुझसे न रूठे।

अमर प्रेम की अमर कहानी
प्रेम से ही जीवन सुहानी।।

सदा जलता रहे प्रेम का चिराग
सदा बढता रहे प्रगाढ़ अनुराग।।

प्रेम सुमन तुमको है अर्पण
रूप तुम्हारा मेरी है दर्पण। ।

सदा साथ निभाना सजनी
जीवन मेरी जगमगाना सजनी।।

रचनाकार-डी पी लहरे

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