मोर भारत भुईयां
मोर भारत भुईयां....
मोर भारत भुईयां के का करव मैं बखान
जम्मो बर बरोबर बने हवे इंहा के सबिधान।।।।
सोन चिरईया भारत भुईयां के दुनिया म हवे मान
तीन रंग के तिरंगा जेखर हवे
पहिचान।।।।
कतको फांसी म झुलिन कतको गोली खाईन
जूर मिल के सबो झन देश अजाद कराईन।।।।
कईसे भुलाबो संगी हमन बीर मनके बलिदान
आज घलो हम देश के खातिर हो जाबो कुरबान। ।।।
हिमालय संग पहरा देवईया हवे हमर जवान
धरती के कोरा म सोन उपजईया हवे हमर किसान।।।।
करजा चूका नई सकन हम भारत भुईयां के संतान
ये माटी म जनम धरे हन इंहा सुख के हे खदान।।।।
बोहाथे इंहा गंगा के अमरीत पानी खेत खलिहान
हिंदू-मुसलिम सिख इसई पढथे बाईबिल गीता अउ कुरान।।।।
धरम करम के अलग गोठ नई हे
मोर सुग्घर हिन्दुस्तान
सुनता म सब मिल के रइथन तभे हे मोर भारत महान।।।।
रचनाकार--डी पी लहरे
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