ऋतु राज
ऋतुराज का आगमन है आज
सर्दी-गर्मी का समागम है आज।।
बसंत करते खुशियों की बरसात
जीवन में भरते उमंग उल्लास। ।
कोयल सुनाते मिठी तान
मधुकर गाते मधुर गान।।
बासंती पुरवाई चले
नील गगन के छाँव तले।।
धरती आज श्रृंगार करे
फूलों में भ्रमर निनाद करे।।
रंग बिरंगे फूलों की महक
डाल-डाल पे चिड़ियों की चहक।।
आम्र झूमते बौर खिलखिलाई
कोयल प्यारी कुक लगाई।।
पीले फूले सरसों टेसू लाल
शुरूआत फागुन उडे गुलाल। ।
भौंरे का फूलों में स्पंदन
बासंती आगमन का अभिनंदन। ।
सुखद जीवन का यही है राज
माँ शारदे की जनम है आज। ।
रचनाकार-डी पी लहरे
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