गुलशन

गुलशन

वादियों के नजारे हम क्या देखें ...
सोखियों के इशारे हम क्या देखें...
इन फ़िजाओं में घुला घुला इत्र..
उनकी यादों का असर है विचित्र..

फूलो की रंगत को देख कैसे नूर छाई है
यहाँ यादों की कली भी निकल आई है

आसमां के सितारे हम क्या देखें ..
कोई कितना हो प्यारे हम क्या देखें ..
दिख रहे ओ मन की ऑखों से..
फब रहे ओ फूलों की साजो से..

दिल देख रहा है प्रकृति में उसका  चित्र ...
जान है मोहब्बत है या है मेरे मित्र ...

है पुरवाई का शरमाना और इतराना..
यादों में दिल हिलता पुरवाई का फुल झडाना...
फूलों को रख ले दिल की निगाहों में...
ख़ुशबू दे मेरी दिल की फ़िजाओं में....

बिखरना नहीं है मुझे लिपटा रहूं तेरी बाहों में...
दिल की हसरत बस देखता रहूँ तुम्हे बहारों में ....

दुनिया के इरादे हम क्या देखें
ओ कस्मे ओ वादे हम क्या देखें ..
ये गुलशन ने लिया चित्र...
दिलों का इश्क है पवित्र...

रचना --डी पी लहरे

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