कविता

✍व्यंग्य ✍

भ्रष्टाचार सबसे घातक घुन है
ये तो लालच का भयानक धुन है

मेरे भारत को खोखला कर रहा है
नेक, अच्छों को दोगला कर रहा है

जात पात का जब तक डेरा रहेगा
मेरा हिन्दुस्तान आगे कैसे बढेगा?

अंधविश्वासों में करोडों जिन्दा हैं
चोर बलात्कारी क्या शर्मिन्दा है ?

घुसखोर,जमाखोर,माला-माल हैं
किसान का देखो यहाँ बुरा हाल है

पढे लिखे लाखो,रहते बेरोजगार हैं
अनपढ़ नेता देश के तारनहार हैं

संस्कृति मरे ये सामाजिक दोष है
हो जाये प्रलय ये मेरा जयघोष है

कहाँ गया है ओ मान मर्यादा
उच्च विचार न जीवन सादा

शब्दविन्यास-✍डी पी लहरे
कबीरधाम छत्तीसगढ़

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