तुम ही तो हो
।कविता!
मेरे मन की मैना तुम हो
मेरे दिन और रैना तुम हो
मेरी मिठी बैना तुम हो
मेरे शुकूं और चैना तुम हो
तुम ही तो हो अहसास मेरे
हम सफर हो हमराज मेरे****
मेरे चाँद,सितारे तुम हो
मेरे बसंती बहारें तुम हो
ये जहाॅन से प्यारे तुम हो
ये दिल को संवारे तुम हो
तुम ही तो हो आवाज मेरी
दर्द दिल के हो इलाज मेरी****
मेरी साँसों की हवा तुम हो
मेरी बातों की वज़ा तुम हो
ये आशिकी का मजा तुम हो
मेरे जिगर की वफ़ा तुम हो
तुम ही तो हो जिन्दगानी मेरी
तुझपे आज सारी जवानी मेरी***
दिल की धडकन तुम हो
ऑखों का फडकन तुम हो
दूरी में तडपन तुम हो
नजदीक में दर्पण तुम हो
तुम ही तो हो कहानी मेरी
मैं राजा और तुम रानी मेरी****
रचनाकार-डी पी लहरे
dplahre86@gmail.com
Comments