जाडा

गोरसी के आगी म राख बिकट हे
ये जाड के सेती उदास बिकट हे।।
काला बतावव ये जाडा के गोठ
जाडा कंपा देथे लईका चाहे पोठ।।
गोरसी के आगी म सेंक अपन हाथ
संगी संगवारी के छुटे झन साथ।।
बोईर के लकडी ह गजब गुंगवाथे
बारबे जब गोरसी त गजब कुहराथे।।
चार के चबेना ल बांट के खाले
गोरसी तीर बईठके बने ददरिया गाले।।
तात तात गोरसी म बने कुनकुनाथे
नान चून बाबू घलो गाना गुनगुनाथे।।
लईका सियान सब ह जडावत हे
संसू दद्दू गोरसी म आगी ल तापत हे।।

लिखईया-डी पी लहरे

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