लोक गीत
गीत
तोर मोर मया कभु छुटय नहीं साथी रे
तै मोर जिनगी के दीया मैं तोर बाती रे....
कुलकत रहिथों मैं हाँ
फुदकत रहिथों मैं हाँ---2
मोर मयारू मंजूर पाखी रे....
तोर मोर मया कभु छुटय नहीं साथी रे
तै मोर जिनगी के दीया मै तोर बाती रे....
जब तोर से मिल नई पावंव लागथे उदासी रे
तोरेच सुध 24 घंटा तहीं दिन-राती रे....
तडपत रहिथों मैं हाँ
तरसत रहिथों मैं हाँ-2
गुन गुन आथे रोवासी रे....
तोर मोर मया कभु छुटय नहीं
साथी रे
तै मोर जिनगी के दीया मै तोर बाती रे....
जिनगी के तोर बर मैं लगा देहू बाजी रे
हमर मया के कभु होवय झन हाॅसी रे....
सजा के रखिहौं मैं हाँ
बसा के रखिहौं मैं हाँ-2
हमर मया के थाथी रे....
तोर मोर मया कभु छुटय नही
साथी रे
तै मोर जिनगी के दीया मै तोर बाती रे....
कापी राईट सुरक्षित है
रचनाकार----डी पी लहरे
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