आरती

सतनाम आरती

आरती होवथे सुबह शाम गुरू हो बाबा
आरती होवथे सुबह शाम--2
हमन जपत हवन सतनाम गुरू हो बाबा""
आरती होवथे सुबह शाम
घोर-मन म बसा के तोरे नाम"""""
मन म बसा के सतनाम,
गुरू हो बाबा
आरती होवथे सुबह शाम''
पद- "पान फूल नरियर तोला हम चढावन
गुरू तोर आरती पंथी हम सब गावन"--2
घोर-तन म जगा के सतनाम--
मन म बसा के गुरू ध्यान"""'-2
पटक-गुरू हो तोर आरती होथे सुबह शाम
बाबा जी तोर आरती होवथे सुबह शाम"""
पद-"घट घट म गुरू तोला हम बसायेन,
तोर पांव के धूररा बाबा माथ म लगायेन"-2
घोर-"गुरू देये हमला ज्ञान,
सब तोरे संतान"-2
पटक-हमन धरेन तोरे ध्यान"गुरू हो तोर आरती होवथे सुबह शाम
बाबा जी तोर आरती होवथे सुबह शाम-2
हमन जपत हवन सतनाम, गुरू जी तोर
बाबा जी तोर,
आरती होवथे सुबह शाम''''
रचना--डी पी लहरे
कबीरधाम
वाटसाप नं.7898690867

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