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Showing posts from February, 2021

सदाबहार छत्तीसगढ़ी गीत

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मोर मनके चंदा मँय- गायक- तँय हा मोर मनके चंदा,मँय हा तोर अगास ओ.. कर दे अँजोरी जिनगी,आके मोर पास ओ..ll2 गायिका तोर बिना होवत हावय-2जिनगी उजास गा मय हा तोर मनके चंदा,तँय हा मोर अगास गा..ll2 करदे अँजोरी जिनगी,आके मोर पास गा... अंतरा-गायक तोर मया पाये बर ओ,जिंवरा ललात हे.. देख सुघराई तोर,मन मुस्कात  हे...ll2 गायिका देख देख तोला बाढ़य,मया के पियास गा. कर दे अँजोरी जिनगी,आके मोर पास गा... अंतरा-2 गायिका तोर सुध मा जियत हावँव,तोर गोठ बात मा.. तोर धुन खोये रहिथौ,रोज दिन रात मा.. गायक राखे हावँव हिरदे मा-मया के मैं आस ओ.. करदे अँजोरी जिनगी,आके मोर पास ओ.. तँय हा मोर मनके चंदा.... गीतकार-डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा छत्तीसगढ़

ताटंक छंद गीत

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ताटंक छन्द गीत.. याद तुम्हारी मन-उपवन में, तितली-सी मँडराती है। दूर चली जाती जब मुझसे, ये धड़कन थम जाती है।। साज बनाकर अपने दिल को, प्रेम गीत मैं गाता हूँ। डूब डूब कर प्रेम राग में, निज अंतर हर्षाता हूँ।। रातें कटती जाग-जागकर, नींद नहीं अब आती है। याद तुम्हारी मन-उपवन में, तितली सी-मँडराती है।।(१) आलिंगन को तड़प रहा हूँ, आ जाते तुम बाहों में  देख रहा हूँ नैन गड़ाये, खड़ा खड़ा मैं राहों में।। सुलझाती थी पहले उलझन, अब दिल को उलझाती है। याद तुम्हारी मन उपवन में, तितली सी मँडराती है।।(२) चैन नहीं है मेरे दिल को, घुट घुट के मैं जीता हूँ। बिना तुम्हारे मेरे दिलबर, ग़म के आँसू पीता हूँ।। विरह मुझे पागल कर देता, याद बहुत तड़पाती है। याद तुम्हारी मन-उपवन में, तितली सी-मँडराती है।।(३) डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा छत्तीसगढ़

गीत(21-02-21)

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गीत रोमांटिक(१) *गायक* आज (मीठ) मिसरी जइसे--2 गोठ बात होगे ओ.. तोर संग चंदा मुलाकात होगो ओ..2 *गायिका* यार (मीठ) मिसरी जइसे--2 गोठ बात होगे न.. तोर संग राजा मुलाकात होगे न..2 अंतरा *गायक* नजर मिलाके तँय हा,दिल मा समाये ओ। शादी मा बुलाके मोला,दिवाना बनाये ओ।।--2 चढ़ान-मया-पिरित के झम झम--2 बरसात होगे ओ.. तोर संग चंदा मुलाकात होगे ओ.. अंतरा *गायिका* तोर मया मा जोही,दुनिया भुलाये हँव। हिरदे के भीतरी मा,तोला मँय सजाये हँव।।-2 चढ़ान-तँय हा मोर जिनगी के--2 सौगात होगे न.. तोर संग राजा मुलाकात होगे न..2 *गायक  गायिका* आज मीठ मिसरी जइसे..गोठ बात होगे ओ यार (मीठ) मिसरी जइसे--2 गोठ बात होगे न.. मुलाकात होगे न.. मुलाकात होगे न..

ग़ज़ल

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ग़ज़ल 212 212 212 2 जख़्म में ताज़गी हो गई है दर्द से आशिक़ी हो गई है साँस चलती है उसके ही दम से *वो मेरी ज़िंदगी हो गई है* वाह कहने लगे लोग पढ़कर क्या हसीं शायरी हो ग‌ई है मेरे अरमानों की इक चिता से  हर तरफ़ रोशनी हो गई है ग़म ख़ुशी *मौज*हम किससे बाँटें  सूनी हर इक गली हो गई है डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा