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कोरोना गीत

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सरसी छंद गीत. कोरोना के कोहराम से,कब होंगे आजाद। पल-पल ये करता ही जाता,जन-जीवन बर्बाद।। मचा हुआ है देखो कैसे,जग में हाहाकार।। मानवता अब तार-तार है,कैसे हो उद्धार।। हिन्दू-मुस्लिम सिख-ईसाई,करें संग फरियाद। कोरोना के कोहराम से कब होंगे आजाद।।(१) मुश्किल जीना हुआ जहां में,आफत में है जान। लगा रोग कैसा ये देखो,मिलता नहीं निदान।। समझ नहीं अब आये कुछ भी,बढ़ा हुआ अवसाद।। कोरोना के कोहराम से,कब होंगे आजाद।।(२) बदहाली का जीवन जीने,हम सब हैं मजबूर। कोरोना के कारण अपने,अपनो से हैं दूर।। कोरोना से कौन लड़े अब,यहाँ नहीं सहजाद कोरोना के कोहराम से,कब होंगे आजाद ।(३) द्वारिका प्रसाद लहरे"मौज" कवर्धा छत्तीसगढ़

लक्ष्मण मस्तुरिहा

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हमेशा जवां - खुमान संगीत : कुछ गीतों की सूची (अधिकांश गीतों के गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया)  न भूतो न भविष्यति....... अमर गीत की पहचान यही है कि कहीं मुखड़ा पढ़ो तो वह गीत हृदय में सुनाई देने लगता है। आइये हृदय के रिकार्ड प्लेयर पर उनके गीत सुनें - मोर संग चलव रे........ मँय बंदत हँव दिन रात मोर धरती मैया जय होवै तोर..... मँय छत्तीसगढ़िया हँव गा....... वा रे मोर पँड़की मैना, तोर कजरेरी नैना....... मन डोले रे "माघ फगुनवा" ........ पता ले जा रे, पता दे जा रे, गाड़ीवाला....... चौरा मा गोंदा रसिया मोर बारी मा पताल...... धनी बिन जग लागे सुन्ना रे........ मोला जावन दे न रे अलबेला मोर........ कोन सुर बाजँव मँय तो घुनही बंसुरिया......... बखरी के तूमा नार बरोबर मन झूमे........ तोर खोपा मा फुँदरा रइहौं बन के......... छन्नर छन्नर पैरी बाजे, खन्नर खन्नर चूरी........ हम तोरे संगवारी कबीरा हो............. तोर बाली हे उमरिया............. नाच नचनी रे झूम झूम के झमाझम.......... कइसे दीखथे आज उदास कजरेरी मोर मैना..... प्राण तर जाई रामा, चोला तर जाई......... लहर मारे लहर बुंदिया.......... प...