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Showing posts from November, 2022

दर्दिला गीत..

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विरह गीत मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2 पखरा समझ के ए हिरदे ला-काबर टोरे-फोरे..2 अंतरा-1 धधकत हावय ए छाती हा,बरसे आगी गोला। तोर बिरह मा दगाबाज ओ,लेशावत हे चोला। ए जिनगी ला दुख दहरा मा-काबर तँय हा बोरे मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2 अंतरा-2 आस रहिस ओ तोर हाथ मा,पहिराये के कँगना। जीवन साथी अपन बनाके,लाये के घर अँगना।। मया बढ़ाके छोड़े मोला-दूसर ले नाता जोरे.. मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2 अंतरा-3 मोर दरद ला कौन समझही,तरतर रोवय नैना। तोर बिना मँय कइसे जीहूँ,लूटे तँय सुख चैना।। बने बँधाये मया के बँधना-काबर छिन मा छोरे... मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2 डी.पी.लहरे"मौज" कापी राईट कवि,गीतकार,ग़ज़लकार, छन्दकार व्याख्याता शा.उ.मा.वि.इंदौरी कवर्धा छत्तीसगढ़

पंथी झूम झूम के

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पंथी(१) झूम झूम के हो बाबा झूम झूम के-2 गुरू पंथी मा नाचौं हो झूम झूम के2 झूम झूम के हो बाबा झूम झूम के-2 गुरू पंथी म नाचौं हो झूम झूम के-2 अंतरा(१) आज हे जयंती गुरू घासी के। सत्य पुरुष अविनासी के।-2 सतनाम के जयकारा हे गुरू बाबा के सहारा हे-2 गिरौदपुरी के माटी चूम चूम के- तोर पंथी म नाचौं झूम झूम के-2 गुरू पंथी म नाँचौं हो झूम झूम के गुरू पंथी म नाचौं हो झूम झूम के अंतरा(2) मंगल चऊँका गुरूबानी के होवाथे बखान गुरू ज्ञानी के-2 गाँव गाँव सजे गुरूद्वारा हे जयंती के धूम आरा पारा हे-2 सत्य के मेला देखौं घूम घूम के गुरू पंथी म नाँचौं हो झूम झूम के गुरू पंथी ल गावौं हो झूम झूम के डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा छत्तीसगढ़