छन्द गीत बहार
छन्द गीत बहार गुरू दोहा छन्द गीत(१) गुरू सहीं जी कोन हे,ये जग मा भगवान। मन अँधियारी टारके,देथे सब ला ज्ञान।। गुरू नाँव ले भागथे,मन के सबो विकार। शिक्षा-दीक्षा ले बने,देथे नवा विचार।। महिमा अगम अपार हे,गुरू ज्ञान के खान। गुरू सहीं जी कोन हे,ये जग मा भगवान।। गुरू सिखाये सीख लव,होही बेड़ा पार। बिना गुरू के जान लव,चलय नहीं संसार।। गुरू बचन अनमोल हे,राखव गा सम्मान। गुरू सहीं जी कोन हे,ये जग मा भगवान।। सार छन्द गीत(२) पाँव परत हँव दाई मँय हा,निसदिन गुन ला गावँव। सात जनम बर बेटा बनके,तोर कोख ले आवँव ।। दया मया ममता सागर हे,महतारी के कोरा। कृपा मोर बर करके दाई,करथस जोंखा तोरा।। महिमा अब्बड़ भारी हावय,काया फूल चढ़ावँव। पाँव परत हँव दाई मँय हा,निसदिन गुन ला गावँव।। सरग बरोबर तोर हाँथ हे,मोला ओ सिरजाये। अँगरी धरके तँय हा दाई,ठुमुक ठुमक रेंगाये।। मोर विधाता तँय हा दाई,सुख छँइहाँ ला पावँव। पाँव परत हँव दाई मँय हा,निसदिन गुन ला गावँव।। तहीं मोर ओ चाँदी सोना,धन दौलत अउ हीरा। मोरे कारन तोला दाई,सहे परय झन पीरा।। बेटा फर्ज निभाके दाई,सेवा तोर बजावँव। पाँव परत हँव दाई मँय हा,निसदिन गुन ला गावँव आल्हा छन्द...