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यार दिवानी

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विरह गीत(32) मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2 पखरा समझ के ए हिरदे ला-काबर टोरे-फोरे..2 अंतरा-1 धधकत हावय ए छाती हा,बरसे आगी गोला। तोर बिरह मा दगाबाज ओ,लेशावत हे चोला। ए जिनगी ला दुख दहरा मा-काबर तँय हा बोरे मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2 अंतरा-2 आस रहिस ओ तोर हाथ मा,पहिराये के कँगना। जीवन साथी अपन बनाके,लाये के घर अँगना।। मया बढ़ाके छोड़े मोला-दूसर ले नाता जोरे.. मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2 अंतरा-3 मोर दरद ला कौन समझही,तरतर रोवय नैना। तोर बिना मँय कइसे जीहूँ,लूटे तँय सुख चैना।। बने बँधाये मया के बँधना-काबर छिन मा छोरे... मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2 डी.पी.लहरे"मौज"