42अमृतवाणी दोहा चौपाई
*मानव समाज बर सदगुरू बाबा घासीदास जी के 42 अमरित वाणी* छंदकार-डी.पी.लहरे "मौज" दोहा+चौपाई छंद *अमृत वाणी (१)* *सत्य ही मानव का आभूषण है..* सत्य नाम हिरदे बसा,सत्य जगत मा सार। मनखे के गहना इही,कहिथे गुरू हमार। *गुरुघासी के अमरित बानी,* *बनगे जग मा अमर कहानी।* *बाबा जी के एही कहना,* *सत हावय मनखे के गहना।।* सत ले ए धरती खड़े,सत ले खड़े अगास। चाँद सुरुज सत मा चलै,जग ला करय उजास। अंतस मा सतनाम बसालौ। गुरु घासी के गुन ला गालौ। मनखे गहना सत ला जानौ। गुरु बाबा के कहना मानौ।। सत मा जे मनखे चलै,ओखर नइया पार। मिलय शांति सुख हा सदा,होवय मन उजियार।। *अमृत वाणी(२)* *मानव-मानव एक समान...* मनखे मनखे एक हे,नइ हे कोनो भेद। जाति भरम के भूत ला,मन ले देवव खेद। *मनखे-मनखे एक बताये,* *छुआ-छूत ला दूर भगाये।* *तोर पाँव के धुर्रा चंदन,* *सदगुरु बाबा तोला वंदन।।* सब मनखे ले राख लौ,दया मया के भाव। मिलके राहव संग मा,समता सुमता लाव।। सब मनखे ला एक्कै जानौ। भाई चारा सुमता लानौ। जात पात के बँधना टोरौ। सब मनखे ले नाता जोरौ।। गुरु बाबा कहिथे सदा,सब के एक्के जात। मिलके राहव जी बने,बिना करे आघात।। *अमृत वाणी(३)*...